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|| श्री सुरभ्यै नमः || आदरणीय गऊभक्त प्रत्येक माह की अमावस्या को आयोजित 8500 गऊवंश की पालकी परिक्रमा पर दिनाँक 26 नवम्बर 2019 मंगलवार सुबह 08:30 से 11:00 बजे तक आप सभी सहपरिवार सादर आमंत्रित हैं. श्री कृष्ण गऊशाला परिवार | संपर्क सूत्र: +91-8527632944

इतिहास

श्री कृष्ण गऊशाला सुलतानपुर डबास का 15 अगस्त 1995 को जन्माष्टमी के दिन तत्कालीन विकास मंत्री (दिल्ली सरकार) श्री साहिब सिंह वर्मा के हाथों हुआ था। इस गऊशाला में शुरू में 15 गौवंश थे। दिल्ली सरकार द्वारा प्रदत्त 177 बीघा भूमि पर यह गऊशाला स्थापित हुआ था। इस गऊशाला का संचालन करने के लिए एक संचालन समिति स्व. सूरजभान गुप्ता(केवल पार्क) के अध्यक्षता में बनाई गयी थी। समिति के सामने गउओं के पीने का पानी की समस्या सबसे जटिल थी। जिसे मंत्री छगनलाल गुप्ता ने अथक प्रयास कर श्री साहिब सिंह वर्मा का सहयोग लेकर हरियाणा के नहर से 4 इंच का मोड़ी मंजूर कराकर का समाधान किया। समिति गौशाला के लिए धन संग्रह करता है और गऊमाता के लिए तुड़े आदि की व्यवस्था करता है। धन संग्रह कर शेडों का निर्माण कार्य शुरू किया, धीरे धीरे नए शेड बनते गए।

देश के अनेक महापुरुष जैसे संत ज्ञानानंद जी महाराज, स्वामी रामदेव जी, साध्वी ऋतम्भरा जी, संत शरणानन्द जी महाराज आदि समय समय पर आकर मार्ग दर्शन करते रहे। 2006 तक गौशाला में 15 शेड और 3 तुड़े के गोदाम बन गए थे। 2006 के बाद गौशाला तेजी से प्रगति के मार्ग पर चल पड़ा। श्री अग्रवाल के नेतृत्व में आधुनिकरण की प्रक्रिया प्रारम्भ हुयी। तूड़ा का एक बहुत बड़ा गोदाम, जिसमे लगभग 25 हजार क्विंटल तूड़ा रखा जाता है का निर्माण शुरू हुआ।

नए पैटर्न का शेड बंनाने का कार्यक्रम बना और बड़े हुए गऊवंश के दृष्टि से एक बड़ा पीने के पानी का तालाब बनाने की योजना पर कार्य प्रारम्भ हुआ। सम्पूर्ण भूमि की चहारदीवारी बनवाई गयी और बाद में उस पर कटीले तार लगवाये गए ताकि कुत्ते गऊशाला में ना आ सकें। गऊशाला में अपना धर्मकांटा है। और यहाँ लगे बायोगैस प्लांट पर सभी सेवकों का खाना बनता है।धीरे-धीरे गऊशाला प्रगति करता गया और अब गऊशाला में लगभग 7000 गऊमाता के शरण देने के लिए 35 छायादार शेड 40 ओपेन शेड हैं। एक शानदार पार्क, यज्ञ मंडप, सभास्थल, 50 हजार क्विंटल तूड़ा रखने के गोदाम, 5 स्टोर रूम, अतिथि भवन, 3 कार्यालय भवन, भोजनालय आदि सभी कुछ पूर्ण विकसित व्यवस्था में चल रहे है ।

  • गऊवंश के पीने के लिये स्व्च्छ पानी के दो वृहद तालाब
  • गऊ माता की चिकित्सा के लिए सम्पूर्ण आधुनिक चिकित्सा साधनों से युक्त विशाल अस्पताल
  • 4 डॉक्टर, 10 कम्पाउण्डर, 10 सुपरवाईजर, एवं 225 अनुभवी गऊ सेवकों की समर्पित टीम
  • लगभग 1000 क्विंटल हरा चारा काटकर गौमाता को खिलाने की व्यवस्था
  • 55 साईकिल रिक्शों द्वारा घर-घर से गऊ ग्रास लाने की व्यवस्था
  • 8 ट्रैक्टर, 75 बैल चालित बुग्गी, 1 जे सी वी द्वारा नियमित सफाई की व्यवस्था
  • घायल एवं दुर्घटनाग्रस्त गौवंश की सेवा हेतु लिफ्ट वाली मेडिकल वैन की व्यवस्था
  • गऊ सेवकों के लिए निःशुल्क भोजन
  • गऊ सेवकों के बच्चों हेतु गौशाला परिसर में विद्यालय का संचालन
  • सौर उर्जा द्वारा गौशाला की विद्युत आपूर्ति
  • कमजोर एवं बीमार गऊवंश हेतु प्रोटीन युक्त अंकुरित हरा चारा हाइड्रोपोनिक द्वारा 1000 किलो प्रतिदिन उत्पादन

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